May 2021

हमें मकान बनाने की चाह होती हैं।

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कुछ भीतर रह जाता हैं, हम बांटते तो हैं खुद को।लेकिन हम बारिश की तरह पूरे खाली होते ही नहीं। हमें आसमान नहीं बनाना होता… Read More »हमें मकान बनाने की चाह होती हैं।

क्रिएटीव्ह-ब्रिएटीव्ह

मी: सगळंच करायचं राहून जातंय… एक दिवस सुटताना दुसरा धरून, वर्षभर पैशांच्या सुखात जाण्याची वाट पाहतोय. कुठेतरी का जगतोय हेच विसरलोय का आपण? जन्म मृत्यू,… Read More »क्रिएटीव्ह-ब्रिएटीव्ह